tag:blogger.com,1999:blog-948725304205485453.post6260981641920844018..comments2007-10-23T16:06:59.813+05:30Comments on INKLING: 3 MISSED CALLS - रात के आंसूSanjay Sinhahttp://www.blogger.com/profile/11189177404352730088noreply@blogger.comBlogger4125tag:blogger.com,1999:blog-948725304205485453.post-15352702038119138362007-10-23T16:06:00.000+05:302007-10-23T16:06:00.000+05:30संजय जी हर इन्सान भाग रहा है किसी ना किसी रूप में ...संजय जी <BR/>हर इन्सान भाग रहा है किसी ना किसी रूप में , शायद मैं भी! इससे ज्यादा नहीं कह सकता।Sagar Chand Naharhttp://www.blogger.com/profile/13049124481931256980noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-948725304205485453.post-76611788511582945522007-10-23T10:44:00.000+05:302007-10-23T10:44:00.000+05:30संजय जी, आपके लेख ने दहला दिया। अपनी महत्वाकांक्ष...संजय जी, आपके लेख ने दहला दिया। अपनी महत्वाकांक्षा के चक्कर में फँसकर हम अपने बाल-बच्चों से जबरन बलिदान ले रहे हैं। - आनंदआनंदhttp://www.blogger.com/profile/08860991601743144950noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-948725304205485453.post-4334507080667573872007-10-23T02:56:00.000+05:302007-10-23T02:56:00.000+05:30वैसे शायद यह हर पत्रकार का टाइम टेबल करीब करीब यही...वैसे <BR/>शायद यह हर पत्रकार का टाइम टेबल करीब करीब यही रहता हैं। अपनी तो अभी शादी नहीं हुई लेकिन पिछले छह साल में शाम तो अपन ने भी कभी नहीं देखी। अब आपने इतना जबरदस्त लिखा कि सोचने को मजबूर हो गया कि क्या इस सवाल का सामना मुझे भी करना होगा। <BR/>पर क्या आपको नहीं लगता पत्रकारों की इस समस्या को आजतक किसी ने नहीं उठाया। <BR/>परसो तरसों पैदा हुई बीपीओ इंडस्टी की चिंता देश दुनिया को है। सुना है उसके लिए अब नई हैल्थ पॉलिसी बन रही है। ओड वर्किंग ओवर में काम करने वालों की जब भी बात आती है बस बात कॉल सेंटर्स पर आकर ही रुक जाती है। पर कभी आखिर कोई पत्रकारों की इस दुविधा को सामने क्यूं नहीं रखता।राजीव जैनhttp://www.blogger.com/profile/07241456869337929788noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-948725304205485453.post-75230795689920903062007-10-23T01:19:00.000+05:302007-10-23T01:19:00.000+05:30संजय भाईआपके दिल में उठा द्वंद जायज है. हर प्रोफेश...संजय भाई<BR/><BR/>आपके दिल में उठा द्वंद जायज है. हर प्रोफेशन की कुछ न कुछ डिमान्ड ऐसी होती है जो आपके सामान्य परिवारिक दायित्वों के निर्वहन पर असर डालती है. ऐसे में एक सामनजस्य बैठाना ही कुशलता का परिचायक है.<BR/><BR/>आपका पेशा ऐसा ही कि शाम को वक्त नहीं मिल पाता. तब कोशिश करके छुट्टी के दिन या जब जब भी जितना समय दे पायें, उतना दें. साल में एक बार मय परिवार अपने रहवास से कुछ दूर अलग वातावरण में छुट्टी मनाने जरुर जायें. यह एक स्वस्थ परंपरा होगी और जीवन के यादगार पल.<BR/><BR/>बाकी तो व्यवसायिक मजबूरियाँ घर वाले भी समझते हैं. धीरे धीरे बच्चे भी समझ जाते हैं. सब कुछ जो किया जा रहा है, उसका निहित में तो परिवार ही है.<BR/><BR/>प्रसन्न रहें. अनेकों शुभकामनायें.<BR/><BR/>वो जिस महिला ने आपकी पत्नि को मिसड कॉल किया, उसके कृत्य को देखते हुए आराम से कहा जा सकता है कि उनके संबंध सामान्य नहीं हैं.Udan Tashtarihttp://www.blogger.com/profile/06057252073193171933noreply@blogger.com