tag:blogger.com,1999:blog-948725304205485453.post4630097715761229772..comments2007-07-13T00:32:24.730+05:30Comments on INKLING: वो 27 सालSanjay Sinhahttp://www.blogger.com/profile/11189177404352730088noreply@blogger.comBlogger4125tag:blogger.com,1999:blog-948725304205485453.post-61289807061969615162007-07-13T00:32:00.000+05:302007-07-13T00:32:00.000+05:30आपकी माताजी बेहद साहसी थीं। और वो आपको बहुत चाहती ...आपकी माताजी बेहद साहसी थीं। और वो आपको बहुत चाहती थीं ये बात हमेशा याद रखियेगा।Debashishhttp://www.blogger.com/profile/05581506338446555105noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-948725304205485453.post-59857441761251731742007-04-01T16:15:00.000+05:302007-04-01T16:15:00.000+05:30आपके संस्मरण पढ़कर कुछ पुरानी यादें ताजा हो गई। सच ...आपके संस्मरण पढ़कर कुछ पुरानी यादें ताजा हो गई। सच है इन्हें वही समझ सकता है जिसने इन्हें खुद कभी महसूस किया है।<BR/><BR/>एक ऐसा समय होता है जब आदमी खुद को निसहाय पाता है, उसका कोई प्रियजन उसे छोड़कर जाने वाला है वो कुछ नहीं कर सकता ऐसा होने से रोकने को। उस समय लगता है कि इंसान बेकार ही अहंकार करता है मैं ये हूँ मैं वो हूँ असल में वो बस किस्मत के हाथों की कठपुतली होता है।<BR/><BR/>उस समय बड़े से बड़ा नास्तिक भी आस्तिक बन जाता है। आदमी का सब अहंकार दूर हो जाता है। होंठों पर बस दुआ और आंखों में आंसू होते हैं।<BR/><BR/>ऐसा एकाध बार जिंदगी में सब के साथ होता है पर ज्यादा तकलीफ तब होती है जब जाने वाला दर्द में जाता है।Shrishhttp://www.blogger.com/profile/15264688244278112743noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-948725304205485453.post-81136813552349102572007-04-01T11:40:00.000+05:302007-04-01T11:40:00.000+05:30कई बार जीवन में ऐसे मौके आते हैं जब स्वयं को एकदम ...कई बार जीवन में ऐसे मौके आते हैं जब स्वयं को एकदम बेबस महसूस करते हैं...<BR/><BR/>कविता से ही-<BR/><BR/>रोशनी जब चुभने लगी....<BR/>आँखे मूँद ली.....<BR/>अँधेरा जो दिखा....<BR/>उसे जानती नहीं......<BR/><BR/>आवाज़ जब शोर बना....<BR/>कर्ण ढ़क दिये.....<BR/>सन्नाटा जो सुनाई दिया....<BR/>उसे जानती नहीं......<BR/><BR/>हसीं ...रोई... हैरान...और परेशान हुई....<BR/>जब भाव थम गये...<BR/>सब शांत हो गया....<BR/>इस शांती को मैं पहचानती नहीं.....<BR/><BR/>सांसों के लय को जीवन कहा...<BR/>जब साँस रुक चली...तो जीव मृत हुआ....<BR/>जो अमृत इस मृत में छुपा ...<BR/>उसे जानती नहीं......<BR/><BR/>कौन सी दहलीज़ पर खड़ी हूँ....<BR/>अंको से दूर.....<BR/>शून्य से इतने कऱीब....<BR/>फासले कौन से मिट रहे....<BR/>यह जानती नहीं......<BR/><BR/>सन्नाटों का शोर....<BR/>भावों का अभाव....<BR/>अँधेरे में जो साया दिखा...<BR/>उसे पहचानती नहीं.....<BR/><BR/>क्या आज हो गई हर अहसास से दूर हूँ......<BR/>या फिर.....<BR/>खुद के...खुदा के....<BR/>किस के करीब हूँ....<BR/>मैं जानती नहीं......<BR/>................................<BR/><BR/><BR/><BR/>वेदना को जब स्व में गूंद लो तो संवेदना बन जाती है....<BR/>भुलाने की कोशिश शायद सही नहीं...मुमकिन भी नहीं... <BR/>दर्द भी जहाँ में कितने हैं...कुछ अपने हैं ...कुछ अपनो के...<BR/>फिर किसने कहा जीवन में दर्द नहीं होता...<BR/>कल था....आज है...कल भी होगा....<BR/>कुछ दवा से...कुछ दुआ से झेलना होगा...<BR/>इस भट्टी में खुद को झोंक खरा करना होगा....<BR/>माँ का दर्द कुछ कम करना होगा...जिन्दगी पर फिर से हँसना होगा....Bejihttp://www.blogger.com/profile/16964389992273176028noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-948725304205485453.post-58848569700002926622007-03-30T18:21:00.000+05:302007-03-30T18:21:00.000+05:30२९ मार्च को मां को तो दर्द से मुक्ति मिल गयी थी ले...२९ मार्च को मां को तो दर्द से मुक्ति मिल गयी थी लेकिन आपके दिल मे वह दर्द अभी भी है! लेकिन शायद यही दर्द है जो आपको आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहा है।आशीषhttp://hindigram.orgnoreply@blogger.com